DEEN DAYAL UPADHYAY GRAMIN KAUSHAL VIKAS YOJANA//दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल विकास योजना गाँव के हाथों को देश की प्रगति से जोड़ती कड़ी

By yojana inf

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भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के हृदय में छिपी असीम प्रतिभा और श्रमशक्ति को निखारने का एक महत्वाकांक्षी मिशन है – ‘दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल विकास योजना’ (DDU-GKY)। यह केवल एक रोजगार कार्यक्रम नहीं, बल्कि ग्रामीण युवाओं के जीवन में गरिमा, आत्मविश्वास और आर्थिक स्वावलंबन का सृजन करने वाला एक सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन है। इसका नाम भारतीय चिंतक पंडित दीन दयाल उपाध्याय के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने ‘अंत्योदय’ यानी सबसे वंचित के उत्थान पर जोर दिया था।

योजना का मूल दर्शन कौशल से स्वाभिमान तक

इस योजना का केंद्रीय विचार स्पष्ट और सशक्त है: “कौशल ही समृद्धि है।” इसका लक्ष्य गरीबी रेखा से नीचे (BPL) के 15 से 35 वर्ष के ग्रामीण युवाओं को निःशुल्क, गुणवत्तापूर्ण कौशल प्रशिक्षण प्रदान करना है, ताकि वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय श्रम बाजार में मांग के अनुरूप रोजगार पा सकें। यह योजना ‘देने वाली’ नहीं, बल्कि ‘सक्षम बनाने वाली’ है।

योजना की विशिष्टताएँ सामान्य से अलग एक खास दृष्टिकोण

1. 3Rs – गुणवत्ता का आधार: योजना की नींव तीन सिद्धांतों पर टिकी है
   · रिलेवेंस (प्रासंगिकता): प्रशिक्षण उन क्षेत्रों में दिया जाता है जहाँ उद्योग की वास्तविक माँग है, जैसे आतिथ्य (हॉस्पिटैलिटी), रिटेल, निर्माण, स्वास्थ्य सेवा, आईटी-आईटीईएस, ऑटोमोबाइल आदि।
   · रिटेंशन (नियोजन की दर): केवल प्रशिक्षण देना ही लक्ष्य नहीं, बल्कि कम से कम 70% प्रशिक्षुओं का नियमित वेतन वाला रोजगार सुनिश्चित करना है।
   · रिम्यूनरेशन (पारिश्रमिक): प्रशिक्षण पूरा करने के बाद न्यूनतम मासिक वेतन (वर्तमान में आमतौर पर ₹6,000 से ₹10,000) की गारंटी दी जाती है।
2. प्लेसमेंट-लिंक्ड प्रशिक्षण: यहाँ प्रशिक्षण किसी सर्टिफिकेट के लिए नहीं, बल्कि कॉन्क्रीट जॉब ऑफर के लिए दिया जाता है। प्रशिक्षण शुरू होने से पहले ही प्रशिक्षण भागीदार (ट्रेनिंग पार्टनर) को रोजगार सुनिश्चित करना होता है।
3. व्यापक सहायता: प्रशिक्षण निःशुल्क है। इसके अलावा, प्रशिक्षुओं को यात्रा भत्ता, आवास भत्ता और प्रशिक्षण अवधि के दौरान पॉकेट मनी भी दी जाती है। यह गरीब परिवारों के युवाओं को आर्थिक चिंता के बिना प्रशिक्षण लेने में सक्षम बनाता है।
4. विशेष ध्यान: योजना में महिलाओं (33% आरक्षण), अनुसूचित जाति/जनजाति के युवाओं और विशेष आवश्यकता वाले व्यक्तियों पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

योजना का क्रियान्वयन एक सुव्यवस्थित मॉडल

यह योजना केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के अंतर्गत आती है और राज्य सरकारों व प्रशिक्षण भागीदार संस्थानों (TPs) के नेटवर्क के माध्यम से क्रियान्वित की जाती है। प्रक्रिया आमतौर पर इस प्रकार है:

· पहचान और भर्ती: ग्राम पंचायत स्तर पर पात्र युवाओं की पहचान की जाती है।
· काउंसलिंग और प्लेसमेंट: युवाओं को विभिन्न व्यवसायों के बारे में जानकारी दी जाती है और उनकी रुचि के अनुसार कोर्स चुनने में मदद की जाती है।
· प्रशिक्षण: चयनित युवाओं को आवासीय या गैर-आवासीय प्रशिक्षण केंद्रों पर भेजा जाता है, जहाँ तकनीकी कौशल के साथ-साथ सॉफ्ट स्किल्स (अंग्रेजी, संचार, व्यक्तित्व विकास) भी सिखाए जाते हैं।
· प्लेसमेंट और पोस्ट-प्लेसमेंट सहायता: प्रशिक्षण पूरा होने पर नियोक्ता कंपनियों में प्लेसमेंट की जाती है। एक साल तक कैरियर परामर्श और समस्या समाधान की सुविधा भी दी जाती है।

प्रभाव और सफलता जीवन बदलने वाले आंकड़े

यह योजना देश के कोने-कोने में लाखों युवाओं के जीवन को बदल रही है। केरल के एक होटल में काम कर रहे युवा, दिल्ली-एनसीआर के एक मॉल में सेल्स एसोसिएट, गुजरात के एक फैक्ट्री में टेक्नीशियन, या दक्षिण भारत के आईटी कैंपस में सपोर्ट स्टाफ – इनमें से कई DDU-GKY के माध्यम से ही अपने गाँव से निकल कर राष्ट्रीय मुख्यधारा में शामिल हुए हैं। इसने न केवल व्यक्तिगत आय बढ़ाई है, बल्कि पलायन रोकने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और युवाओं में नई आशा जगाने का काम किया है।

आवेदन कैसे करें

ग्रामीण युवा इस योजना का लाभ लेने के लिए:

1. अपने गाँव के ग्राम रोजगार सहायक (Gram Rozgar Sahayak) या ब्लॉक विकास अधिकारी (BDO) के कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं।
2. आधिकारिक वेबसाइट ddugky.gov.in पर जाकर नजदीकी प्रशिक्षण केंद्र और कोर्स के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
3. पात्रता (आयु, आय सीमा, शैक्षणिक योग्यता) की जाँच करनी होगी।

निष्कर्ष: ‘अंत्योदय’ की ओर एक सशक्त पहल

दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल विकास योजना सही मायने में ‘स्किल इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान की रीढ़ है। यह योजना उस सोच को साकार कर रही है कि देश का विकास तभी संभव है जब गाँव के अंतिम पायदान पर खड़े युवा को भी उसकी क्षमता के अनुरूप अवसर मिले। यह कौशल के माध्यम से गरीबी के चक्र को तोड़कर, ग्रामीण भारत को देश की प्रगति का एक सक्रिय और गौरवशाली भागीदार बना रही है। यह सिर्फ रोजगार नहीं, आत्मविश्वास और स्वाभिमान देने की योजना है।

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