परिचय:-नमस्कार दोस्तों महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा), जिसकी शुरुआत 2006 में हुई थी, 2026 तक अपनी यात्रा के 20 वर्ष पूरे करने को है। यह दुनिया का सबसे बड़ा सामाजिक सुरक्षा और रोजगार सृजन कार्यक्रम, अगले दो वर्षों में नए लक्ष्यों और बदलावों के साथ ग्रामीण भारत के विकास की कहानी का केंद्रीय पात्र बना रहेगा। 2026 का मनरेगा न केवल रोजगार देने वाली योजना है, बल्कि जलवायु अनुकूल कृषि, जल सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने का एक शक्तिशाली उपकरण बनने जा रहा है।
मनरेगा 2026 एक समग्र ग्रामीण विकास मॉडल की ओर
पिछले 18 वर्षों के अनुभव के आधार पर, 2026 में मनरेगा की भूमिका सिर्फ ‘मजदूरी’ देने से आगे बढ़कर ‘ग्रामीण संपदा’ निर्माण के व्यापक लक्ष्य पर केंद्रित होगी। यह ग्रामीण क्षेत्रों को बदलने वाली एक समग्र योजना के रूप में उभरेगा।
2026 के लिए प्रमुख नए फोकस क्षेत्र और संभावित सुधार
1. जलवायु-सहनशील कार्यों पर जोर
· प्राथमिकता: अब कार्यों की सूची में ‘जलवायु-अनुकूल कार्य’ श्रेणी को प्रमुखता दी जाएगी। इसमें वाटरशेड प्रबंधन, चेक डैम निर्माण, पराली प्रबंधन और वन भूमि का पुनरुद्धार शामिल होंगे।
· हरित मनरेगा: कार्यों का 60% से अधिक हिस्सा जल संरक्षण, भूमि सुधार और वनीकरण से जुड़ा होगा।
2. डिजिटल और तकनीकी उन्नयन
· रियल-टाइम मॉनिटरिंग: सभी कार्यस्थलों पर जीपीएस-टैग्ड फोटो और वीडियो अपलोड की अनिवार्यता।
· मोबाइल ऐप आधारित मैपिंग: ग्राम स्तर पर संसाधन मानचित्र बनाना ताकि कार्यों की योजना वैज्ञानिक तरीके से बन सके।
· ब्लॉकचेन-आधारित भुगतान: मजदूरी भुगतान में और पारदर्शिता लाने के लिए तकनीक के प्रयोग पर विचार।
3. कौशल विकास और उत्पादकता लिंकेज
· प्रशिक्षित मजदूरों को प्राथमिकता: जल संरक्षण, वृक्षारोपण, ग्रेनाइट/पत्थर के काम में प्रशिक्षित श्रमिकों को मजदूरी के साथ-साथ कौशल भत्ता देने का प्रावधान।
· मनरेगा और कौशल भारत का एकीकरण: कुछ चुनिंदा कार्यों में काम करने वाले श्रमिकों को औपचारिक कौशल प्रमाणपत्र दिया जाना, जिससे उन्हें भविष्य में बेहतर रोजगार मिल सके।
4. महिला सशक्तिकरण को विशेष बल
· महिला-केंद्रित कार्य: क्रेच (दिन-देखभाल केंद्र) की स्थापना, महिला स्वयं सहायता समूहों से जुड़े उत्पादन केंद्रों का निर्माण।
· श्रमिक साथी के रूप में महिलाएं: अधिक महिलाओं को ‘मेट’ (कार्य अधीक्षक) और तकनीकी सहायक के पदों पर लाना।
योजना के मूलभूत लाभ (2026 के संदर्भ में)
· कानूनी अधिकार: प्रति परिवार 100 दिनों का रोजगार गारंटी का कानूनी अधिकार बना रहेगा। (150 दिनों तक बढ़ाने की मांग पर विचार जारी रहेगा)।
· मजदूरी दर: राज्यवार मजदूरी दरों का निर्धारण जारी रहेगा, जो कृषि मजदूरी से जुड़ा होगा। इसे समय पर और डीबीटी के माध्यम से दिया जाएगा।
· सामाजिक सुरक्षा: श्रमिकों का पेंशन और बीमा से जुड़ाव मजबूत करने के प्रयास।
· ग्रामीण बुनियादी ढांचा: गाँवों में ड्रेनेज, सड़क, तालाब, आंगनवाड़ी केंद्र जैसे स्थायी संपत्ति का निर्माण।
2026 में पात्रता और आवेदन प्रक्रिया (अपेक्षित)
· पात्रता: कोई भी वयस्क ग्रामीण परिवार जिसके वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक श्रम करने को तैयार हों।
· आवेदन: ऑनलाइन/ऑफलाइन दोनों माध्यम उपलब्ध होंगे।
· ग्राम पंचायत में लिखित आवेदन।
· मोबाइल ऐप या एमनेगा पोर्टल के जरिए ऑनलाइन।
· जॉब कार्ड: आवेदन स्वीकृत होने पर निशुल्क जॉब कार्ड जारी किया जाएगा, जो एक डिजिटल/भौतिक पहचान पत्र होगा।
मनरेगा 2026: ग्रामीण अर्थव्यवस्था के पहिये की धुरी
2026 में मनरेगा की कल्पना एक ऐसी योजना के रूप में की जा रही है जो
1. मांग-आधारित रोजगार देती है।
2. जल और मिट्टी की सेहत सुधारती है।
3. ग्रामीण मजदूरी को बढ़ावा देती है।
4. महिलाओं को आर्थिक ताकत बनाती है।
5. जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से लड़ने में गाँवों की मदद करती है।
चुनौतियाँ और नई रणनीति
· भुगतान में देरी: डिजिटल एकीकरण को और मजबूत करने पर जोर।
· कार्यों की गुणवत्ता: तकनीकी विशेषज्ञता बढ़ाने और तृतीय-पक्ष मूल्यांकन को बढ़ावा।
· भ्रष्टाचार: सामाजिक ऑडिट को और प्रभावी बनाना तथा सार्वजनिक निगरानी के लिए सूचना पोर्टलों को अपग्रेड करना।
निष्कर्ष
मनरेगा योजना 2026 ग्रामीण भारत के पुनर्निर्माण का एक जीवंत और गतिशील साधन बनने जा रही है। यह अब सिर्फ एक सुरक्षा जाल नहीं, बल्कि ग्रामीण समृद्धि का इंजन है। यह योजना हमें याद दिलाती है कि देश की असली ताकत उसके गाँवों में बसती है, और मनरेगा उस ताकत को निखारने का काम कर रही है। 2026 में, यह योजना और भी अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और परिणामोन्मुखी होगी। यह केवल सरकार की योजना नहीं, बल्कि हर ग्रामीण नागरिक का अधिकार और हर देशवासी की जिम्मेदारी है। आइए, हम मनरेगा को सफल बनाने में अपना योगदान दें।






