नमस्कार दोस्तों प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा एवं महाभियान योजना, जिसे पीएम-कुसुम योजना के नाम से भी जाना जाता है, भारतीय कृषि क्षेत्र में एक ऐतिहासिक बदलाव लाने वाली पहल है। यह केवल एक सब्सिडी योजना नहीं, बल्कि किसानों को ‘उर्जा उत्पादक’ बनाकर उनकी आय दोगुनी करने और देश की हरित ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने का एक सशक्त मॉडल है।
योजना का मूल दर्शन आत्मनिर्भर ऊर्जा से आत्मनिर्भर किसान
इस योजना का केंद्रीय विचार सरल पर गहरा है: ‘हर किसान ऊर्जा उत्पादक बने’। यह कृषि को बिजली के उपभोक्ता से, उसके उत्पादक में बदल देती है। यह तीन प्रमुख समस्याओं का एकीकृत समाधान प्रस्तुत करती है:
1. किसानों की डीजल पर निर्भरता और सिंचाई लागत में कमी।
2. कृषि क्षेत्र को नियमित और सस्ती बिजली की आपूर्ति।
3. देश के नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों की प्राप्ति।
योजना के तीन स्तंभ त्रि-आयामी दृष्टिकोण
पीएम-कुसुम योजना को तीन व्यापक घटकों (कंपोनेंट) में बांटा गया है, जो किसान की विभिन्न जरूरतों को पूरा करते हैं:
1. घटक-ए: सोलराइजेशन ऑफ एग्रीकल्चरल पंप्स (कृषि पंपों का सौरीकरण)
· लक्ष्य: डीजल/बिजली से चलने वाले मौजूदा कृषि पंपों को सोलर एनर्जी सिस्टम से बदलना।
· लाभ: किसान डीजल की बढ़ती लागत से मुक्त हो जाता है और सिंचाई के लिए मुफ्त सौर ऊर्जा का उपयोग करता है। सरकार इस पर उच्च सब्सिडी (60% तक) प्रदान करती है।
2. घटक-बी: स्टैंड-अलोन सोलर पंप्स (स्वतंत्र सौर पंप)
· लक्ष्य: उन क्षेत्रों में जहां बिजली ग्रिड नहीं पहुंचा है, वहां स्टैंड-अलोन ऑफ-ग्रिड सोलर पंप लगाना।
· लाभ: ग्रिड कनेक्शन के बिना ही किसानों को सौर ऊर्जा से सिंचाई की सुविधा मिलती है। यह दूर-दराज के इलाकों के लिए वरदान है।
3. घटक-सी: सोलराइजेशन ऑफ ग्रिड-कनेक्टेड पंप्स (ग्रिड से जुड़े पंपों का सौरीकरण)
· यह घटक योजना की सबसे क्रांतिकारी धारणा है।
· लक्ष्य: किसान अपने खाली खेत या छत पर सोलर पैनल लगाकर बिजली बनाए और अतिरिक्त बिजली को सरकारी ग्रिड को बेचे।
· लाभ: किसान के लिए यह दोहरी आय का स्रोत बन जाता है – एक तरफ फसल से आमदनी, दूसरी तरफ बिजली बेचकर नियमित आय। इससे खेती का जोखिम कम होता है। इस पर भी 60% तक की सब्सिडी दी जाती है।
पात्रता एवं लाभ कौन और कैसे उठा सकता है फायदा
· पात्र लाभार्थी: देश के सभी व्यक्तिगत किसान, सहकारी समितियां, पंचायतें, किसान उत्पादक संगठन (FPO) इस योजना के पात्र हैं।
· वित्तीय सहायता: योजना के तहत केंद्र सरकार 60% तक की सब्सिडी देती है, राज्य सरकार 30% तक की सहायता दे सकती है, और किसान को केवल 10% हिस्सा देना होता है। इससे किसान के लिए बहुत कम लागत में यह प्रणाली स्थापित कर पाना संभव हो जाता है।
· अन्य लाभ:
· सिंचाई लागत में भारी कमी।
· डीजल/बिजली की अनिश्चितता से मुक्ति।
· नियमित अतिरिक्त आय (बिजली बेचकर)।
· पर्यावरण संरक्षण में योगदान।
आवेदन प्रक्रिया सीधे और सरल कदम
1. जानकारी और फॉर्म: अपने राज्य के नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग (MNRE की राज्य नोडल एजेंसी) या बिजली वितरण कंपनी (डिस्कॉम) के कार्यालय से संपर्क करें। ऑनलाइन पोर्टल pmkusum.mnre.gov.in पर भी जानकारी उपलब्ध है।
2. पात्रता की जांच: अपनी जरूरत के अनुसार योजना के तीनों घटकों में से सही विकल्प चुनें और पात्रता शर्तें पूरी करें।
3. आवेदन जमा करें: संबंधित विभाग में आवेदन फॉर्म के साथ जरूरी दस्तावेज (जमीन के कागजात, आधार, बिजली कनेक्शन विवरण आदि) जमा करें। कई राज्यों में ऑनलाइन आवेदन की सुविधा भी है।
4. तकनीकी मंजूरी एवं स्थापना: आवेदन की जांच के बाद, मंजूरी मिलने पर MNRE से मान्यता प्राप्त विक्रेता द्वारा सिस्टम की स्थापना की जाती है।
5. सब्सिडी और कमीशनिंग: स्थापना के बाद सब्सिडी राशि जारी होती है और सिस्टम चालू हो जाता है। घटक-सी के तहत डिस्कॉम के साथ बिजली खरीद समझौता (PPA) होता है।
योजना का व्यापक प्रभाव कृषि क्रांति से ऊर्जा क्रांति तक
पीएम-कुसुम योजना का असर सीधे किसान की जेब से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक दिखाई देगा:
· किसान सशक्तिकरण: किसान ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनेगा, उसकी आय स्थिर और बढ़ेगी।
· जल संरक्षण: नियमित और सस्ती सौर ऊर्जा से सिंचाई होने पर भूजल दोहन पर नियंत्रण में मदद मिलेगी।
· रोजगार सृजन: ग्रामीण क्षेत्रों में सौर ऊर्जा क्षेत्र में नए रोजगार पैदा होंगे।
· जलवायु लक्ष्य: यह योजना भारत के 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य को प्राप्त करने में एक बड़ी भूमिका निभाएगी।
निष्कर्ष एक हरित और समृद्ध भविष्य की आधारशिला
प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा एवं महाभियान योजना (पीएम-कुसुम) भारत की कृषि और ऊर्जा नीतियों का एक सफल समागम है। यह योजना किसान को सिर्फ सहायता प्राप्तकर्ता नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का एक सक्रिय भागीदार बनाती है। यह एक ऐसी क्रांति है जो खेतों में हरियाली लाने के साथ-साथ, देश को एक हरित ऊर्जा भविष्य की ओर भी ले जा रही है। यह सच्चे अर्थों में ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ की भावना को चरितार्थ करती है।






