नमस्कार दोस्तों हर गर्भवती मां के मन में एक ही अरमान होता है—”मेरा बच्चा सलामत पैदा हो, और मैं भी सलामत रहूं।” लेकिन भारत के ग्रामीण इलाकों में आज भी लाखों महिलाएं घर पर ही प्रसव कराने को मजबूर हैं, क्योंकि अस्पताल दूर है, पैसे नहीं हैं, या फिर जानकारी का अभाव है। इन्हीं चुनौतियों को देखते हुए भारत सरकार ने साल 2005 में जननी सुरक्षा योजना (JSY) की शुरुआत की थी।अब साल 2026 में आते-आते यह योजना सिर्फ एक सरकारी स्कीम नहीं, बल्कि देश की करोड़ों महिलाओं की जिंदगी बदलने वाली ताकत बन चुकी है। आइए, जानते हैं कैसे यह योजना मां और बच्चे दोनों की सुरक्षा की नई इबारत लिख रही है।
क्या है जननी सुरक्षा योजना?
जननी सुरक्षा योजना राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत चलने वाली एक केंद्र प्रायोजित योजना है। इसका मुख्य उद्देश्य है—संस्थागत प्रसव (Institutional Delivery) को बढ़ावा देना। यानी महिलाएं घर पर दाई के भरोसे प्रसव कराने के बजाय सरकारी अस्पताल, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) या सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में जाकर बच्चे को जन्म दें।इस योजना की सबसे खास बात यह है कि इसमें आशा (ASHA) कार्यकर्ताओं को बीच की कड़ी बनाया गया है। आशा दीदियां ही गर्भवती महिलाओं को अस्पताल लेकर जाती हैं, उनका पंजीकरण कराती हैं, और प्रसव के बाद उनकी देखभाल भी सुनिश्चित करती हैं।
कितने पैसे मिलते हैं? (विस्तार से)
योजना के तहत मिलने वाली राशि इस बात पर निर्भर करती है कि महिला ग्रामीण क्षेत्र में रहती है या शहरी, और वह Low Performing State (LPS) में है या High Performing State (HPS)।
Low Performing States (जहां संस्थागत प्रसव की दर कम है):
इन राज्यों में उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड, झारखंड, छत्तीसगढ़, असम, ओडिशा और जम्मू-कश्मीर शामिल हैं।
| क्षेत्र | माँ को मिलने वाली राशि | आशा कार्यकर्ता को मिलने वाली राशि | कुल |
| ग्रामीण | ₹1,400 | ₹600 | ₹2,000 |
| शहरी | ₹1,000 | ₹400 | ₹1,400 |
कौन ले सकता है इस योजना का लाभ? (पात्रता)
यदि आप या आपकी जानने वाली कोई गर्भवती महिला इस योजना का लाभ लेना चाहती है, तो ये शर्तें पूरी होनी चाहिए:
- LPS राज्यों (UP, Bihar, MP, Rajasthan आदि) में: कोई भी गर्भवती महिला, चाहे वह कितने भी बच्चे की मां क्यों न हो, सरकारी अस्पताल में प्रसव कराने पर यह सहायता पाने की हकदार है। यानी यहां आय या जाति की कोई बाधा नहीं है।
- HPS राज्यों में: केवल BPL, अनुसूचित जाति (SC) या अनुसूचित जनजाति (ST) की महिलाएं ही पात्र हैं।
- उम्र: महिला की उम्र कम से कम 19 वर्ष होनी चाहिए।
- प्रसव का स्थान: प्रसव सरकारी स्वास्थ्य केंद्र (PHC, CHC, जिला अस्पताल) या मान्यता प्राप्त निजी अस्पताल में ही होना चाहिए।
असली तस्वीर: सफलताएं और चुनौतियां (2026 अपडेट)
साल 2026 में यह योजना जहां लाखों महिलाओं तक पहुंच रही है, वहीं इसकी चुनौतियां भी सामने आ रही हैं।
✅ सकारात्मक पक्ष: बदलती तस्वीर
उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले की बात करें तो यहां 25 अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 के बीच 29,861 गर्भवतियों का सुरक्षित प्रसव सरकारी अस्पतालों में हुआ है। यह आंकड़ा बताता है कि महिलाएं अब घर पर प्रसव कराने के बजाय अस्पताल जाने लगी हैं।
योजना के तहत प्रसव के बाद प्रसूता को कम से कम 48 घंटे अस्पताल में रुकने की व्यवस्था है, जहां उन्हें भोजन, दूध और अन्य सुविधाएं दी जाती हैं। साथ ही नवजात और मां की 42 दिन तक नियमित देखरेख की जाती है।
⚠️ चुनौतियां: कहां हो रही देरी?
हालांकि, सब कुछ सही नहीं है। गाजियाबाद में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच हुए 19,165 प्रसवों में से 5,695 महिलाओं को अब तक अनुदान नहीं मिला है। सबसे बुरी स्थिति सीएचसी बम्हैटा की है, जहां 146 प्रसवों में से सिर्फ 10 महिलाओं के खाते में पैसे आए।
वहीं बिहार के मधुबनी जिले में भी मार्च 2025 से मार्च 2026 के बीच करीब 50,000 लाभार्थियों की राशि एक साल से अधिक समय से लंबित थी। हाल ही में प्रशासन सक्रिय हुआ और अब तक लगभग 6,000 महिलाओं के खाते में पैसे भेजे जा चुके हैं।
सरकार के नियम के अनुसार, अस्पताल से छुट्टी होते-होते महिला के खाते में अनुदान पहुंच जाना चाहिए, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है।
आवेदन कैसे करें? (आसान प्रक्रिया)
इस योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन की कोई अलग वेबसाइट नहीं है। यह प्रक्रिया पूरी तरह आशा कार्यकर्ताओं और सरकारी अस्पतालों के माध्यम से होती है।
स्टेप बाय स्टेप प्रक्रिया:
- गर्भावस्था की जानकारी देते ही बनवाएं MCP कार्ड: जैसे ही गर्भावस्था कन्फर्म हो, अपनी आशा दीदी या नजदीकी PHC में जाकर MCP (मातृ एवं शिशु सुरक्षा) कार्ड बनवा लें। यही आपकी पहचान है।
- नियमित जांच कराएं: गर्भावस्था के दौरान समय-समय पर जांच (ANC) कराती रहें। यह जानकारी MCP कार्ड में नोट होती है。
- सरकारी अस्पताल में प्रसव कराएं: डिलीवरी के लिए सरकारी अस्पताल, PHC या CHC में जाएं।
- प्रसव प्रमाण पत्र लें: अस्पताल से डिलीवरी सर्टिफिकेट जरूर लें।
- दस्तावेज आशा को दें: सभी दस्तावेज—आधार कार्ड, MCP कार्ड, बैंक पासबुक, प्रसव प्रमाण पत्र—अपनी आशा कार्यकर्ता को सौंप दें। वे पोर्टल पर आपका डेटा दर्ज करेंगी।
- DBT से आएगा पैसा: सत्यापन के बाद 15-30 दिनों में राशि सीधे आपके बैंक खाते में DBT (Direct Benefit Transfer) से आ जाएगी।
जरूरी दस्तावेज
- आधार कार्ड (महिला और पति)
- MCP कार्ड
- बैंक पासबुक (जिसमें आधार लिंक हो)
- प्रसव प्रमाण पत्र
- BPL/राशन कार्ड (यदि लागू हो)
क्यों है यह योजना इतनी जरूरी?
हर साल हजारों महिलाएं घर पर प्रसव के दौरान होने वाली जटिलताओं की शिकार हो जाती हैं। जननी सुरक्षा योजना ने इसी समस्या से निपटने का काम किया है। यह केवल 1400 रुपये देने की योजना नहीं है, बल्कि यह प्रसव के दौरान मां और बच्चे दोनों की जान बचाने की योजना है।
जब एक महिला अस्पताल में प्रसव कराती है, तो उसे नि:शुल्क दवाएं, इलाज, जांच और एंबुलेंस की सुविधा भी मिलती है। साथ ही, अगर किसी कारणवश सिजेरियन (C-section) कराना पड़े तो उसका भी खर्च सरकार उठाती है।
निष्कर्ष
जननी सुरक्षा योजना 2026 आज देश की सबसे बड़ी मातृत्व सहायता योजनाओं में से एक है। यह सच है कि गाजियाबाद, मधुबनी जैसे जिलों में भुगतान में देरी की समस्या है, लेकिन यह भी सच है कि कौशांबी, लोनी और सैकड़ों अन्य जगहों पर यह योजना हर महीने हजारों मां-बच्चे की जान बचा रही है।
























