दोस्तों देश की राजनीति में शुक्रवार, 24 अप्रैल 2026 को एक ऐसा भूचाल आया, जिसने आम आदमी पार्टी (AAP) की नींव हिला कर रख दी। पार्टी के सबसे चर्चित और युवा चेहरे राघव चड्ढा (Raghav Chadha) ने न सिर्फ पार्टी छोड़ी, बल्कि राज्यसभा के 6 अन्य सांसदों के साथ भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया ।यह घटनाक्रम AAP के लिए अब तक का सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि चड्ढा को पार्टी का ‘पोस्टर बॉय’ और भविष्य का चेहरा माना जाता था। आइए, इस बड़े राजनीतिक उलटफेर से जुड़ी हर अपडेट और उसके पीछे की कहानी विस्तार से समझते हैं।
क्या हुआ? AAP को लगा ‘म्यूटिनी’ का झटका

आम आदमी पार्टी के राज्यसभा में कुल 10 सांसद थे। शुक्रवार को राघव चड्ढा, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, स्वाति मालीवाल, हरभजन सिंह, राजिंदर गुप्ता और विक्रम साहनी ने एक साथ पार्टी छोड़ने की घोषणा की ।राघव चड्ढा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि AAP के 10 में से 7 सांसद (दो-तिहाई बहुमत) अब BJP के साथ हैं। उन्होंने संविधान के तहत ‘विलय’ (Merger) का हवाला देते हुए राज्यसभा चेयरमैन को पत्र सौंपकर इसकी औपचारिकता पूरी कर दी । बाद में ये सभी नेता BJP मुख्यालय पहुंचे और पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन से मुलाकात की ।
इस बड़े विद्रोह के बाद अब राज्यसभा में AAP के पास केवल तीन सांसद बचे हैं – संजय सिंह, एनडी गुप्ता और बलबीर सिंह सीचेवाल . AAP को जहां यह नुकसान हुआ है, वहीं अब BJP के पास राज्यसभा में और मजबूती आने की संभावना बन गई है।
राघव चड्ढा ने क्यों छोड़ी AAP? ये रहे बड़े कारण
राघव चड्ढा, जो कभी अरविंद केजरीवाल के करीबी सहयोगी और पार्टी के सबसे तेज तर्रार प्रवक्ता हुआ करते थे, ने अपने इस कदम के पीछे कई वजहें गिनाईं:
- भ्रष्टाचार का आरोप: चड्ढा ने साफ शब्दों में कहा कि “आम आदमी पार्टी अब भ्रष्ट और समझौतावादी हाथों में जा चुकी है।” उन्होंने कहा कि जिस पार्टी को उन्होंने अपने खून-पसीने से संवारा, वह अब अपने मूल सिद्धांतों से भटक चुकी है। उन्होंने कहा कि वह ‘निराश, विचलित और घृणित’ (disappointed, disenchanted and disgusted) महसूस कर रहे थे ।
- ‘शीशमहल’ विवाद: चड्ढा ने दिल्ली के मुख्यमंत्री आवास को लेकर चल रहे विवाद (‘शीशमहल’) को पार्टी की हार की बड़ी वजह बताया। उन्होंने कहा कि अब ‘शीशमहल 2.0’ की तस्वीरें सामने आने से पार्टी की छवि और खराब हुई है और यह आत्मचिंतन का विषय है ।
- पार्टी में ‘गलत’ दिशा: संदीप पाठक ने भी पार्टी छोड़ते हुए कहा कि वह अपने 10 साल के करियर में पहली बार ऐसा कर रहे हैं, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में उनके पास कोई चारा नहीं बचा था ।
‘डर’ की अफवाहों पर क्या बोले चड्ढा?
जब AAP नेतृत्व ने कहा कि ये नेता ED की कार्रवाई के डर से भाग रहे हैं, तो चड्ढा ने पलटवार किया। उन्होंने कहा, “हम डर से नहीं, बल्कि इसलिए निकले क्योंकि हम निराश और घृणित महसूस कर रहे थे” ।
क्या बोली AAP? संजय सिंह ने उठाया सवाल

AAP के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने इस कदम को ‘गद्दारी’ करार दिया। उन्होंने तुरंत कहा कि वह राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल को अयोग्य ठहराने के लिए राज्यसभा चेयरमैन को पत्र लिखेंगे । संजय सिंह का आरोप है कि BJP ने ‘ऑपरेशन लोटस’ के तहत AAP के सांसदों को तोड़ने का काम किया। दिलचस्प बात यह है कि कुछ साल पहले राघव चड्ढा खुद इसी ‘ऑपरेशन लोटस’ के खिलाफ बयानबाजी करते नजर आते थे, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि AAP विधायकों को 20-20 करोड़ रुपये की पेशकश की जा रही है ।
अन्ना हजारे ने किसे ठहराया जिम्मेदार?
इस पूरे घटनाक्रम पर आम आदमी पार्टी के सूत्रधार अन्ना हजारे ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने साफ कहा कि 7 सांसदों के पार्टी छोड़ने की जिम्मेदारी AAP के नेतृत्व की है। उन्होंने कहा, “अगर पार्टी ने सही रास्ते पर चलना जारी रखा होता, तो शायद ये लोग नहीं जाते। जब पार्टी ही गलत दिशा में जाएगी तो लोग जाएंगे ही” । हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि स्वार्थ के लिए पार्टी बदलना सही नहीं है।
चड्ढा का सियासी सफर: केजरीवाल के करीबी से लेकर ‘बगावत’ तक
राघव चड्ढा का यह सियासी सफर काफी दिलचस्प रहा है। उन्होंने अपना करियर अन्ना हजारे के आंदोलन से शुरू किया था और 2012 में आम आदमी पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक थे ।
· 2015: महज 26 साल की उम्र में दिल्ली में जबरदस्त जीत के बाद वह पार्टी के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बने ।
· 2020: राजेंद्र नगर से विधायक चुने गए और दिल्ली जल बोर्ड के उपाध्यक्ष बने ।
· 2022: पंजाब से राज्यसभा सांसद चुने गए। पंजाब में AAP की जबरदस्त जीत में उनकी अहम भूमिका मानी जाती है ।
· Gen Z के आइकन: वह अपने संसदीय भाषणों और जिग वर्कर्स के मुद्दों को उठाने के लिए सोशल मीडिया पर काफी लोकप्रिय थे ।
‘Gen Z’ का साथ छूटा? फॉलोअर्स में भारी गिरावट
हालांकि, पार्टी बदलने के तुरंत बाद राघव चड्ढा को अपने युवा समर्थकों (Gen Z) का दर्द भी देखने को मिला। खबरों के मुताबिक, उनके Instagram फॉलोअर्स में 24 घंटों के भीतर लगभग 13 लाख की गिरावट आ गई। शुक्रवार को जहां उनके 1.46 करोड़ फॉलोअर्स थे, वह शनिवार शाम तक घटकर 1.33 करोड़ रह गए। सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ ‘अनफॉलो’ अभियान चलाया जा रहा है ।
AAP पर आगे क्या असर पड़ेगा?
राघव चड्ढा जैसे कद्दावर और युवा चेहरे के जाने से AAP को तो नुकसान हुआ ही है, लेकिन इसका सबसे बड़ा खतरा दिल्ली विधानसभा पर मंडरा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, AAP के डर को यह है कि कहीं यह ‘विद्रोह’ दिल्ली के विधायकों तक न फैल जाए। फिलहाल दिल्ली में AAP के पास सिर्फ 22 विधायक बचे हैं, और अगर BJP ने यहां ‘ऑपरेशन लोटस’ चलाया तो मुश्किलें और बढ़ सकती हैं ।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि BJP को राघव चड्ढा के रूप में एक ऐसा दमदार और युवा चेहरा मिल गया है, जो आने वाले समय में खासकर पंजाब चुनाव (2027) से पहले AAP के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है ।























